मकड़ी, सर्प और हाथी
तीन प्राणियों ने इस स्थान पर शिव की पूजा की: एक मकड़ी, एक सर्प और एक हाथी। तीनों उस पूजा के दौरान मरे।
शिव ने तीनों को फिर जीवित किया और उन्हें मोक्ष, मुक्ति, दी। इनक्रेडिबल इंडिया द्वारा प्रकाशित विवरण इस प्रसंग से नगर और मंदिर, दोनों के नाम को समझाता है। श्री मकड़ी है, काल सर्प, हस्ती हाथी — श्री-काल-हस्ती।
कहा जाता है कि ये प्राणी स्वयं गर्भगृह में भी दिखते हैं। लिंग के आधार पर एक मकड़ी, हाथी के दो दाँत और पाँच फनों वाला सर्प दिखने का वर्णन किया जाता है।
लंबा स्थल पुराण — हर प्राणी ने कैसे पूजा की, और उनकी पूजा ने उन्हें आपस में कैसे टकराव में डाला — यहाँ नहीं सुनाया गया है, क्योंकि हमने इसे अभी तक किसी प्राथमिक ग्रंथ में या देवस्थानम के अपने प्रकाशन में नहीं पढ़ा है।
यह विवरण कहाँ से आया है
- सरकारी: Ministry of Tourism, Government of India — Incredible India, "Srikalahasti Temple" incredibleindia.gov.in · 2026-10-09 को देखा गया